सरफराज ने कप्तान को नजरअंदाज कर इसे किया अपना शतक समर्पित, बताया इस वजह से निकले “आंसू”

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Sarfaraz dedicates his century ignoring the captain, because of this
PC: BCCI

23 वर्षीय सरफराज पिछले 2 सीजन में अपने बल्ले और प्रदर्शन से जहाँ लाखों फैंस का दिल जीता है वहीँ चयनकर्ता का दिल पिघलाने में कामयाब नहीं रहे हैं । शायद यह बड़ी वजह रहा जब मुंबई की ओर से फाइनल रणजी ट्रॉफी मुलाबले में शतक लगाने के बाद सरफराज भावुक होकर रोने लगे । जहाँ उन्होंने बताया की वे क्यों भावुक हुए ।



गौरतलब मुंबई की पृथ्वी शॉ की अगुवाई वाली टीम में  सरफराज खान ने बवंडर लेकर आये हैं । जहाँ एक के बाद अच्छे प्रदर्शन से वो ना केवल अपने फैंस में इजाफा करते दिखाई दे रहे हैं वहीँ अब फैंस उनके टेस्ट क्रिकेट में प्रवेश को लेकर मांग को भी आवाज़ देने में जुट गई है । अगर युवाओं की बात करते तो पृथ्वी शॉ , शुभमन गिल जैसे युवा प्रतिभा फल एही टेस्ट में अपनी कैप प्राप्त कर चुके हैं । लिहाजा अब सरफराज अपने बाले से भारतीय टीम के दरवाजे को तोड़ने में लगे हुए हैं ।

सरफराज खान की पारी की बात की जाये तो उन्होंने रणजी ट्रॉफी 2022 के फाइनल मुकाबले में मध्य प्रदेश के विरूद्ध खेलते हुए शानदार 134 रनों की पारी खेली है. जहाँ फैंस को टेस्ट मैच में उन्होंने टी 20 मैच का मजा प्रदान किया । 13 चौके और 2 छक्के की मदद से उन्होंने 134 रन बनाये ।



मुंबई की टीम ने सरफराज खान की शतकीय पारी के बदौलत पहली पारी में मुंबई ने 374 रन बनाए। जहाँ पृथ्वी शॉ ने 47 रन का योगदान दिया ।  सरफराज खान ने शतक जड़ने के साथ रणजी ट्रॉफी 2022 में अपने 900 रनों का नाकड़ा भी पूरी कर लिया । सरफराज ने 2022 में 8 पारी में कुल 4 शतक लगाने का रिकॉर्ड भी बनाया है ।

2019-20 रणजी सीजन में सरफराज खान ने खेले गेय कुल 6 मैचों में शानदार  3 शतक और दो अर्धशतकीय पारी की बदौलत 154.67 की औसत से शानदार 928 रन बनाए थे. वहीँ अपनी फॉर्म को जारी रखते हुए सरफराज ने अपनी बल्ले के रनों से साबित कर दिया है कि वे अब टेस्ट जर्सी भारत की पहनने के लिए तैयार लग रहे हैं ।

सरफराज ने बताया क्यों हुए थे भावुक



सरफराज ने कहा की पहले रणजी में खेलना का सपना था । फिर बचपन से  खेलते हुए आये हैं और ये सपना देखा की रणजी के फाइनल में शतक बनाऊ इस वजह मई इमोशनल हो गया था । 800 रन से ऊपर बनाने के बाद उन्होंने यह कहा की ” यह कोशिश रहती है की गेंद को छोड़ कर खेलु , टाइम कर के खेलु और परिस्थिति के अनुरूप खेलु । मुझे प्रेशर में खेलना पसंद है और मई कोशिश यही करता हूँ की मई अपना बेस्ट प्रदर्शन दूँ । उनके बाद में यह शतक अपने पिता को समर्पित किया ।

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