दिनेश कार्तिक (55 रन), हार्दिक पंड्या (46 रन) और आवेश खान (4 विकेट) के शानदार प्रदर्शन की बदौलत भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 82 रन से रौंदकर 2-2 से सीरीज को बराबरी पर ला खड़ा किया है । जहाँ पिछले 2 मैच में भारतीय टीम ने पलटवार करते हुए दक्षिण अफ्रीका को यह बता दिया है की टीम इंडिया में रोहित, विराट , लोकेश राहुल , बुमराह , शमी नहीं तो क्या इस टीम में दिनेश कार्तिक, ईशान , आवेश , भुवि , हार्दिक जैसे धुरन्धर बल्लेबाज़ हैं जो अगर अपनी पार आ गए तो बास समझो खैर नहीं .
चौथी बार टॉस करने के बाद भारतीय टीम को बल्लेबाज़ी के लिए आमंत्रित किया गया । जहाँ पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में 6विकेट गंवाकर 169 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीकी टीम 16.5 ओवर में नौ विकेट गंवाकर 87 रन ही बना सकी।
हार्दिक और कार्तिक बने संकटमोचक

टीम इंडिया के लिए अपने जीवन के सर्वश्रेठ फॉर्म में चल रहे दिनेश कार्तिक ने एक बार फिर साबित किया की अभी भी कार्तिक में दम है की वे वन मैन आर्मी बनकर तूफान ला सकते हैं , जहाँ राजकोट के मैदान पर कार्तिक राजा की तरह खेले ।jउन्होंने 27 गेंद में 55 रनों की पारी 203.70 के स्ट्राइक रेट से खेली । वहीँ यह कार्तिक की टी 20I करियर में पहली फिफ्टी है।
हार्दिक ने भी दिखाया दम । जहाँ हार्दिक ने भी शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए 31 गेंद पर 46 रन की पारी खेली । जहाँ उन्होंने 3 चौके और 3 छक्के जड़े ।
आवेश खान का आया कहर
विकट के सूखे से इस सीरीज में जुंझ रहे आवेश खान ने पहले ही भाप लिया की किस लेंथ पर गेंद डालनी है फिर क्या था हार्ड लेंथ पर गेंदबाज़ी की और विकेट टू विकेट गेंद रखी जहाँ इसका फायदा ये रहा की उन्होंने 4 ओवर में 16 रन देकर अपना करियर बेस्ट 4 विकेट चटका दिए । वहीँ हर्षल को एक सफलता और चहल को 2 सफलता राजकोट के मैदान पर मिली ।

ऋषभ पंत ने पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन पर कहा
मैंने जिस एक्सेक्यूशन और बेहतर क्रिकेट खेलने के बारे में बात की और यहां परिणाम हैं। टॉस का अधिक फायदा नहीं होता ,जो भी टीम बेहतर क्रिकेट खेलती है वह खेल जीत जाती है। हो सकता है कि मैं अगले गेम में दाहिने हाथ से टॉस करूं और सकारात्मक रहूं।

हार्दिक ने जिस तरह से प्रदर्शन किया उससे वाकई बहुत खुश हूं। दिनेश कार्तिक ने मैदान में उतरने के साथ ही कोहराम मचा दिया इससे हमें सकारात्मकता मिली।
एक व्यक्ति के रूप में मैं कुछ क्षेत्रों में सुधार करना चाह सकता हूं। हालांकि बहुत चिंतित नहीं हूँ ; सकारात्मकता सोच और सुधार करने की गुंजाईश हर मैच में होती है । देखते हैं बेंगलुरु में क्या होता है। अपना 100% देने के लिए तत्पर हैं।







