वीडियो: IND के सफल कप्तान धोनी के 3 ऐसे निडर निर्णय, जिसके बाद पूरा देश उनका हो गया था शुक्रगुजार

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3 such fearless decisions of IND's successful captain Dhoni, after which the whole country was thankful to him

अगर आज की तारीख में विश्व के सबसे बेहतरीन कप्तान का विकल्प का चुनाव हो तो शत प्रतिशत धोनी का नाम पहले पायदान पर आएगा विश्व क्रिकेट के महानतम फिनिशर एवं कप्तान रह चुके महेंद्र सिंह धोनी ऐसे ना बन चुके हैं जिसे शायद दुनिया की हर एक टीम अपनी प्लेइंग इलेवन का कप्तान बनाना चाहे।




आखिर किस वजह से उन्हें बतौर कप्तान और फिनिशर इतना विश्व में सम्मान मिला। चाहे डीआरएस का सबसे अच्छा विश्लेषक हो चाहे मैच किस ओर मोड़ करवट बदल रहा हो धोनी से अच्छा इसकी गणना शायद ही अभी नई पीढ़ी में कोई कर पाए।

भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज और कप्तान हो चुके महेंद्र सिंह धोनी की सबसे बड़ी विरासत यह थी कि उन्होंने अपनी टीम और खिलाड़ी के बीच खुद को निस्वार्थ लीडर के तौर पर पेश किया। सचिन नई पीढ़ी के लिए पाजी बने तो धोनी माही भाई।




धोनी ने अंत में भले ही कप्तानी छोड़ दी हो लेकिन जब विराट ने सार्वजनिक तौर पर ये कहा की भले ही धोनी ने कप्तानी छोड़ी हो लेकिन वे इस पीढ़ी के लिए सदेव मेंटर और कप्तान बने रहेंगे।

भारतीय इतिहास के सबसे सफल कप्तान जिन्होंने लिए थे ये 3 निडर निर्णय

टी 20 वर्ल्ड कप 2007 फाइनल मुकाबला

साल 2007 वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबले में जब धोनी ने जोगेंद्र सिंह के हाथों में आखिरी ओवर देकर ना केवल भारत को चैंपियन बनाया वहीं जोगेंद्र सिंह के नाम को भी इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया। 24 सितंबर का दिन इतिहास के पन्नों में अमर हो गया । पाकिस्तान को आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रन चाहिए थे और एक विकेट हाथ में थे।




मैच तब और रोमांचक रहा जहां ओवर धोनी ने जोगेंद्र सिंह को दी। पहली गेंद वाइड रही, दूसरी गेंद पर मिस्बाह ने छक्का जड़ दिया। पाकिस्तान को 4 गेंद पर 6 रन की दरकार थी। जहां अगली गेंद पर मिस्बाह ने स्कूप शॉट खेला और गेंद सीधी श्रीशांत के हाथों में गई और भारत ने 5 रन से पाकिस्तान को मात दी थी और कप पर कब्जा किया था।

आईसीसी चैंपियन ट्रॉफी 2013 फाइनल

बर्मिंघम में खेले गए इस रोमांचक मैच में धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 5 रन से करारी हार दी थी। वर्षा प्रभावित मैच को सीमित कर 20 ओवर करने के बाद भारत ने बल्लेबाजी करते हुए 129 रन 20 ओवर में बनाए।

इसके बाद धोनी ने 18 वें ओवर को इशांत को दिया जिन्होंने अपने फेके गए 3 over में 27 रन लुटाए थे। वहीं उन्होंने अपने ओवर में मोर्गन और बोपारा को आउट कर मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया। वहीं आखिरी 6 गेंद पर इंग्लैंड को 15 रन चाहिए थे जहां फिर धोनी ने अश्विन को गेंद थमाई और अश्विन ने कप्तान को निराश नहीं किया और भारत ने यह मैच 5 रन से फाइनल मैच जीत लिया।

साल 2011 विश्व कप




जब मुरलीधरन के ओवर बचे होने के कारण धोनी ने खुद को ऊपर प्रमोट कर पांचवें नंबर पर जिसपर युवराज जाते थे उसपर खुद उतरे और 91 रन की शानदार पारी नाबाद पारी खेलकर छक्के के साथ मैच को फिनिश करवाया। जहां युवराज सिंह जिन्होंने सर्वाधिक रन के साथ विकेट भी चटकाए थे उनसे ऊपर उतरकर ये फैसला लेना बेहद निडर और सटीक था।

 

 

 

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